लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने समाज के हर वर्ग तक विकास की रोशनी पहुंचाने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं. इनमें से एक है प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना, जो विशेष रूप से अनुसूचित जाति (SC) बाहुल्य गांवों के लिए लागू की गई है. इस योजना के तहत, ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करके सामाजिक समावेशन और समग्र विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है.
अनुसूचित जाति बाहुल्य गांवों में सुधार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति भी विकास की मुख्यधारा में शामिल हो और उसे सभी बुनियादी सुविधाएं मिलें. इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने 2025-26 तक 12,492 गांवों का चयन किया है, जिनमें 40 फीसदी से अधिक अनुसूचित जाति की जनसंख्या है. इन गांवों में न्यूनतम 500 जनसंख्या निर्धारित की गई है ताकि योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके.
ग्रामीण विकास के लिए विशेष योजनाएं
प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत, राज्य सरकार इन गांवों में कई विकासात्मक कार्यों को प्राथमिकता दे रही है. इनमें पेयजल एवं स्वच्छता व्यवस्था, विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में शौचालयों का निर्माण, सोलर लाइट्स और स्ट्रिट लाइट्स की स्थापना, बोरवेल, डिजिटल लाइब्रेरी, ट्रांसफॉर्मर, मोटर शेड, शवदाह गृह और पाइपलाइन एक्सटेंशन जैसी सुविधाएं शामिल हैं. इन सभी प्रयासों का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों का जीवन स्तर बेहतर बनाना, उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना है.
विकेंद्रीकृत व्यवस्था से कार्यों में तेजी
शिव प्रसाद, उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के प्रबंध निदेशक, ने बताया कि UPSIDCO के माध्यम से अब तक 2,562 ग्रामों में विकास कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं. इनमें से 910 ग्रामों में कार्य पूरा हो चुका है, और बाकी ग्रामों में कार्य तेजी से प्रगति पर हैं. इस योजना के तहत, विकेंद्रीकृत व्यवस्था लागू की गई है, जिससे ग्राम पंचायतों को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है. इससे जहां एक ओर प्रशासनिक प्रक्रिया सरल हुई है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर निगरानी और जवाबदेही भी सुनिश्चित हो रही है.
सामाजिक समावेशन की दिशा में एक कदम
प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के माध्यम से, योगी सरकार न केवल गांवों के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रही है, बल्कि अनुसूचित जाति समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठा रही है. यह योजना समान विकास, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की अवधारणा को साकार करने की दिशा में एक अहम प्रयास है.
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