छत्तीसगढ़ की योगिता मंडावी को मिला राष्ट्रीय बाल पुरस्कार, महज 13 की उम्र में बनीं इस खेल की टॉप खिलाड़ी

छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव जिले की युवा जूडो खिलाड़ी योगिता मंडावी ने अपनी उत्कृष्टता और मेहनत से न केवल प्रदेश बल्कि देश का नाम रोशन किया है.

Yogita Mandavi of Chhattisgarh received the National Child Award
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छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव जिले की युवा जूडो खिलाड़ी योगिता मंडावी ने अपनी उत्कृष्टता और मेहनत से न केवल प्रदेश बल्कि देश का नाम रोशन किया है. प्रदेश की प्रतिभाशाली बालिका को उनके खेल क्षेत्र में शानदार उपलब्धियों के लिए प्रतिष्ठित प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. यह सम्मान उन्हें नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा प्रदान किया गया.

योगिता मंडावी की जूडो में शानदार यात्रा

योगिता मंडावी ने बेहद कम उम्र में ही जूडो खेल में अपनी विलक्षण क्षमता का परिचय दिया है. महज 13 वर्ष की आयु में, योगिता ने राज्य की श्रेष्ठ जूडो खिलाड़ी का खिताब हासिल किया. इस उम्र में ही उनकी कड़ी मेहनत और निरंतर सुधार ने उन्हें जूडो की दुनिया में एक अग्रणी खिलाड़ी बना दिया. उन्होंने राज्य स्तर पर अपनी पहचान बनाई और फिर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी कड़ी मेहनत का परिणाम देखा.

राष्ट्रपति से प्राप्त किया सम्मान

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार समारोह में योगिता को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से प्राप्त हुआ. इस समारोह में देशभर से चुने गए अन्य बच्चों को भी उनके विभिन्न क्षेत्रों में योगदान के लिए सम्मानित किया गया. योगिता के लिए यह एक ऐतिहासिक पल था, क्योंकि इसे न केवल उनके खेल कौशल की मान्यता मिली, बल्कि यह देश की सबसे बड़ी प्रतिष्ठा का प्रतीक भी है.

सीएम साय ने दी बधाई

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने योगिता मंडावी की इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है. उन्होंने कहा कि प्रतिभाशाली बच्चों की सफलता से नई पीढ़ी को आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने की प्रेरणा मिलती है.

योगिता की उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है, बल्कि बालिका गृह एवं बाल कल्याण संस्थाओं में रह रहे बच्चों के लिए प्रेरणा का सशक्त स्रोत भी है. उन्होंने यह साबित किया है कि संसाधनों की सीमाएँ नहीं, बल्कि सपनों के प्रति लगन और परिश्रम ही सफलता का वास्तविक आधार है.

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