यूक्रेन की नई तैयारी! 250 लड़ाकू विमानों की करने जा रहा महाडील

फ़रवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के समय कीव के पास वायुशक्ति बेहद सीमित थी. उपलब्ध आधिकारिक और खुले स्रोतों के अनुसार उस वक्त यूक्रेन के पास कुल मिलाकर लगभग 98 लड़ाकू विमान थे, जिनमें से आधे ही व्यावहारिक रूप से ऑपरेशनल थे. पुराने सोवियत ज़माने के मिग और एसयू सीरिज़ के विमान उसकी मुख्य ताकत थे.

Zelensky on operation to defeat russia any how deal of 250 fighter jets
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फ़रवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के समय कीव के पास वायुशक्ति बेहद सीमित थी. उपलब्ध आधिकारिक और खुले स्रोतों के अनुसार उस वक्त यूक्रेन के पास कुल मिलाकर लगभग 98 लड़ाकू विमान थे, जिनमें से आधे ही व्यावहारिक रूप से ऑपरेशनल थे. पुराने सोवियत ज़माने के मिग और एसयू सीरिज़ के विमान उसकी मुख्य ताकत थे. 43 मिग-29, 26 एसयू-27, 17 एसयू-25 और 12 एसयू-24 जैसी इकाइयाँ. पश्चिमी आधुनिक विमानों का अभाव और सीमित रिफाइनिंग वायु क्षमताओं के कारण कई विश्लेषकों ने माना कि यही कमजोरी व्लादिमीर पुतिन के आक्रामक इरादों को प्रोत्साहित कर सकती थी.

लेकिन युद्ध ने एक बात साफ कर दी — पुराने उपकरण और संख्या ही सब कुछ नहीं बताते. यूक्रेन ने प्रभावी एयर-डिफेंस नेटवर्क खड़ा कर दिया, जिसकी वजह से रूस की वायु श्रेष्ठता पूरी तरह से उपयोगी नहीं साबित हुई. फिर भी, लंबे समय के लिए यह पक्षपात स्पष्ट था: एडवांस मल्टीरोल और फाइटर जेट की कमी यूक्रेन के लिए बड़ी चुनौती बनी रही.

विजन-2035: एक नई राष्ट्रीय प्राथमिकता

युद्ध के अनुभवों ने कीव को सिखाया कि भविष्य में सुरक्षा का आधार आधुनिक वायुशक्ति होगी. इसी सोच के साथ यूक्रेन ने विजन-2035 नामक योजना तैयार की है. एक व्यापक रणनीति जिसके तहत अगले वर्षों में देश की वायुसेना को पूरी तरह पुनर्गठित और आधुनिकीकरण किया जाएगा. लक्ष्य साफ है: एक ऐसी एयरफोर्स तैयार करना जो न सिर्फ वर्तमान संघर्षों में काम आए, बल्कि 2035 तक दीर्घकालिक आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता भी दे. विजन-2035 के बिंदु स्पष्ट हैं. लड़ाकू विमान की संख्या बढ़ाना, विविध स्रोतों से आधुनिक जेट हासिल करना, और उन विमानों को स्थानीय अभियानों व मौजूदा रडार-एयर-डिफेंस के साथ पूरी तरह एकीकृत करना.

तीन-धुरी रणनीति: ग्रिपेन, राफेल और एफ-16

योजना के अंतर्गत यूक्रेन ने यूरोप और अमेरिका के साथ तीन-तरफ़ा वार्ताओं की रणनीति अपनाई है. प्रमुख प्रस्तावों में ये शामिल हैं. Saab JAS 39 Gripen E (स्वीडन): स्वीडिश ग्रिपेन की सस्ती मेंटेनेंस लागत, हाईवे-लैंडिंग क्षमता और परिचालन सहजता इसे आकर्षक विकल्प बनाती है. अगर यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो यूक्रेन बड़े पैमाने पर ग्रिपेन ऑपरेटर बन सकता है. डिलीवरी की संभावित शुरुआत 2027-28 से मानी जा रही है और 2035 तक इसका बड़ा हिस्सा वायुसेना में आ जाने की योजना है.

Dassault Rafale (फ्रांस): राफेल की रणनीतिक क्षमता और मध्यम-दीर्घ दूरी की हवा-से-हवा मिसाइलों के साथ इसकी क्षमता यूक्रेन के लिए महत्वपूर्ण है. अगर राफेल डील पूरी हुई तो यूक्रेन इस विमान का एक प्रमुख ऑपरेटर बन सकता है.

F-16 (अमेरिका): युद्ध के बाद नाटो सहयोगी देशों ने यूक्रेन को कई F-16 देने का वादा किया; पहले से ही कुछ पुराने F-16 यूक्रेन को सौंपे जा चुके हैं और उनका उपयोग शुरू हो गया है. F-16 का नेटवर्किंग और लड़ाकू मिशनों में सिद्ध रिकॉर्ड इसे आवश्यक विकल्प बनाता है.

इन तीनों माध्यमों से विविधता लाने का उद्देश्य एक ही प्रकार पर निर्भरता कम करना और अलग-अलग मिशन प्रोफाइल के लिए उपयुक्त विमान रखना है. साथ ही, आधुनिक मिसाइलों और रडार-सिस्टम के साथ इंटीग्रेशन पर ज़ोर दिया जा रहा है ताकि ये विमान घरेलू रक्षा वास्तुकला का हिस्सा बन सकें.

राफेल डील की रणनीतिक अहमियत

राफेल अगर यूक्रेन को मिलता है तो यह युद्ध-परिवेश में बड़ा गेम-चेंजर हो सकता है. फ्रांसीसी राफेल पहले से कई एशियाई और यूरोपीय देशों के बेड़े में सक्रिय है और इसकी रणनीतिक मिसाइल क्षमताएँ इसे एक बहुमुखी प्लेटफॉर्म बनाती हैं. यूक्रेन के लिए राफेल का मतलब होगा बेहतर रेंज, अधिक क्षमता और उच्च-स्तरीय एयरोनॉटिकल समर्थन.

क्या यह रूस के रणनीतिक समीकरण बदल देगा?

यूक्रेन के लक्ष्य स्पष्ट हैं: एक ऐसी वायुसेना तैयार करना कि भविष्य में किसी भी बड़े हमले की सोचना भी कठिन हो जाए. 250 से अधिक आधुनिक जेटों का लक्ष्य अगर हासिल हो गया — और उन्हें घरेलू एयर-डिफेंस, लॉजिस्टिक्स और मेंटेनेंस नेटवर्क के साथ जोड़ दिया गया — तो यह न केवल सीमापार आक्रमण की लागत बढ़ाएगा, बल्कि किसी भी संभावित आक्रामक को दो बार सोचने के लिए मजबूर करेगा.

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